सोमवार, 1 अगस्त 2011

लोकपाल नहीं लौह्पाल बनाना है


तेतरवेनामा
लोकपाल नहीं लौह्पाल बनाना है 
दिलीप तेतरवे
मन्ना लाल  खुश हैं कि उनके नाम में देश के एक मात्र सामजिक प्राणी के नाम का  अंतिम अंश शामिल  है. मन्ना  और अन्ना  के बीच तुकबंदी हो सकती है. मन्ना लाल  तैश में हैं. उनहोंने आन्ना जी की भाषा और ठस्सेबाजी अपना ली है. और जब देखो तब वे शुरू हो जाते हैं," अरे आप लोग क्या जानियेगा. हमें तो लोकपाल नहीं लौह्पाल बनाना है. अगर मुझे लगा कि लौह्पाल से काम नहीं चलेगा तो मैं हीरापाल या प्लेटिनमपाल बनाउंगा." 
          सो मन्ना लाल  लग गए हैं," अरे जनाब हमें वह बात भी सीना ठोंक कर कह देने की आदत है जो अन्ना जी कहते हुए डर-खप जाते हैं.यानी कि हम जो लौह्पाल या प्लेटिनमपाल बनायेंगे वह आरएसएस के सरसंघचालक जैसा सुप्रीम कुर्सीदार होगा. बड़ा ही खूंखार होगा. जिसका नाम सुनते ही मंत्री पद की शपथ लेने पहुंचे नेता, शपथ पत्र फाड़ कर हिमालय की और चल देंगें और संन्यास ले लेंगे. जिसके  खड़े होते ही संसद, न्यायपालिका, कार्यपालिका और पत्रकारिता शाष्टांग  दंडवत हो जायेंगे. जिसका फुल कंट्रोल संसद के ऊपर होगा. संसद में हर सदस्य वही बोलेगा जो मेरा लौह्पाल  बोलने के लिए स्वीकृति देगा. ठीक उसी तरह जैसे आर एस एस के सरसंघ चालक के इशारे पर उसका संघ, उसके मातहत की संस्थाएं और विविन्न कोटि के सदस्य बोलते हैं. लौह्पाल को छोड़ कर किसी अन्य चिन्तक, नेता, न्यायाधीश, अफसर, चपरासी या चोर-उचक्का को सोचने-समझने की छूट नहीं होगी." 
         मन्ना लाल बड़े भयानक चिन्तक हैं, " मैं चिंतन करते हुए किसी बात की चिंता नहीं करता. मैं चिंतन करते हुए तथ्यों और आधारों की चिंता नहीं करता. मैं बाथरूम में बीड़ी के कस लगाते हुए जो सोचता हूँ वही फ़ाइनल होता है. सो मैंने फाइनल कर दिया है कि मेरा लौह्पाल जनता के बीच कभी कभी या साल दो साल में प्रकट होगा. उनके सामने जितने व्यक्ति बैठेंगे  उनका नाम और पता लौह्पाल चेक करेंगे और उनकी  भक्ति का प्रमाणपत्र भी देखेंगे. जो उनका भक्त नहीं होगा वह उनके सामने पंक्ति में नहीं बैठ पायेगा. बिलकुल आर एस एस की बैठकों की तरह. मेरे लौह्पाल के सामने बैठे व्यक्तियों की पूरी गिनती होने के बाद इसकी सूचना लौह्पालक  को उनके परम भक्त और सेवक देंगे. फिर जो मेरे लौह्पालक  बोलेंगे वह ब्रह्मलकीर हो जाएगा."
       मन्ना लाल का स्पष्ट चिंतन है," लौह्पाल  का दिमाग ऐसे तो खाली होगा,  लेकिन उनके सलाहकार बड़े घाघ होंगे. वे  घाघ भूषन होंगे या फिर नागफूषण होंगे,यह तो वक्त ही बताएगा. लेकिन, वे दिन में करप्ट लोगों की कोर्ट में पैरवी करेंगे और शाम में मेरे लौह्पाल को  करप्शन दूर करने के तरीके बताएँगे. और मेरे लौह्पाल उसी पर अमल करेंगे. करप्शन वही दूर कर सकता है जो घाघ भूषण हो या नागफूषण. करप्शन सरदारभूषन  दूर नहीं कर सकते, क्योंकि उनको करप्शन करने का थोडा भी अनुभव नहीं है. जीरो करप्शन की मानसिकता वाले लोग नक्कारा होते हैं. मेरा लौहपाल  भी करप्शन एक्सपर्ट  होगा. वह जो बोलेगा, वह कभी करेगा नहीं. वह वक्त के अनुसार अपने सिद्धांत और नीति बदलता रहेगा. उसके पास मुखौटों का बड़ा भण्डार होगा."
           

सोमवार, 7 फ़रवरी 2011

माँ सरस्वती को नमस्कार.....

हमारा भारत देश माँ की कृपा से सदियों तक विश्व का ज्ञान गुरु रहा. और उनकी ही कृपा से हम फिर से विश्व के ज्ञान गुरु बनने की ओर आगे बढ़ रहे हैं. माँ की कृपा हो हम पर है, लेकिन हमें उनकी कृपा का पात्र बनने के लिए लगनशील होना होगा. हमें रात-दिन की मेहनत करनी होगी. हमें समय के साथ कदम मिला कर चलना होगा. समय सबसे कीमती चीज है. बीता समय कभी लौट कर नहीं आता  है. और जो समय के साथ, लगन के साथ बढ़ता है, दुनिया की हर जंग जीत लेता है.

          जब हम माँ के सामने नतमस्तक होते हैं, तब जो ज्ञान की किरणें  हम पर बरसती हैं, वह सन्देश देती हैं कि ज्ञान से प्रकाशित हो जाओ और अपनी दुनिया, अपने देश, अपने समाज का मान बढ़ाने  वाले काम करो, मानवता को लिए काम करो. जीवन का उद्देश्य मात्र धन कमाना नहीं है. बीते युगों में कितने धनिक हुए, लेकिन उनका कोई इतिहास नहीं है. किन्तु  हम आज भी वेद और पुराण से ज्ञान पाते हैं और उनके रचने वालों को नमन करते हैं. हम वाल्मिक, तुलसी, वाण भट्ट, चरक, कणाद, वराहमिहिर को कभी भूल नहीं सकते. हमारे  ज्ञान रत्नों ने हमारा मान विश्व  में स्थापित किया.
           आप छात्रगण  भी अपने जीवन की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए यहाँ  प्रयत्न कर रहे हैं. माँ से मेरी प्रार्थना है कि वह आपकी आकांक्षाओं को पूरा करें.
          वन्दे माँ सरस्वती..