सोमवार, 7 फ़रवरी 2011

माँ सरस्वती को नमस्कार.....

हमारा भारत देश माँ की कृपा से सदियों तक विश्व का ज्ञान गुरु रहा. और उनकी ही कृपा से हम फिर से विश्व के ज्ञान गुरु बनने की ओर आगे बढ़ रहे हैं. माँ की कृपा हो हम पर है, लेकिन हमें उनकी कृपा का पात्र बनने के लिए लगनशील होना होगा. हमें रात-दिन की मेहनत करनी होगी. हमें समय के साथ कदम मिला कर चलना होगा. समय सबसे कीमती चीज है. बीता समय कभी लौट कर नहीं आता  है. और जो समय के साथ, लगन के साथ बढ़ता है, दुनिया की हर जंग जीत लेता है.

          जब हम माँ के सामने नतमस्तक होते हैं, तब जो ज्ञान की किरणें  हम पर बरसती हैं, वह सन्देश देती हैं कि ज्ञान से प्रकाशित हो जाओ और अपनी दुनिया, अपने देश, अपने समाज का मान बढ़ाने  वाले काम करो, मानवता को लिए काम करो. जीवन का उद्देश्य मात्र धन कमाना नहीं है. बीते युगों में कितने धनिक हुए, लेकिन उनका कोई इतिहास नहीं है. किन्तु  हम आज भी वेद और पुराण से ज्ञान पाते हैं और उनके रचने वालों को नमन करते हैं. हम वाल्मिक, तुलसी, वाण भट्ट, चरक, कणाद, वराहमिहिर को कभी भूल नहीं सकते. हमारे  ज्ञान रत्नों ने हमारा मान विश्व  में स्थापित किया.
           आप छात्रगण  भी अपने जीवन की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए यहाँ  प्रयत्न कर रहे हैं. माँ से मेरी प्रार्थना है कि वह आपकी आकांक्षाओं को पूरा करें.
          वन्दे माँ सरस्वती..
         

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें