शनिवार, 31 जुलाई 2010

सबसे जरूरी तो मोहनवा को धरना है....

          बिहार में चुनाव पर्व शुरू होने वाला है और अब जरूरत होगी पावर की, गोली की, लाठी की, दबंगों की, सभी पार्टियों को होगी जरूरत! चलें देखें कि कैसी तैयारी चल रही है.....
           लाल साहेब की पार्टी की बैठक शुरू हो चुकी है और लाल साहब अपनी गद्दी पर बैठ कर असली तैयारी पर अपने विचार रख रहे हैं," ऐस कैसे होगा चुनाव फिट ? अरे सुनो, बीच में कौनो नहीं बोलेगा.... प्रभुदेवा को तो पटा लिए हैं लेकिन, ससुरा का कोई ठीक नहीं है, कब बिदक जाए. कब बन्दर की तरह पलटनिया मार दे और छपरा-  सिवान हिले लगे..तस्लिमवा , ललनवा और मोहनवा को, बूझता है,  नजर के आई में रखना है. "

          लाल साहेब जैसे साँस लेने के लिए  रुके कि धप्प से कलुआ  बोल पडा,' साहेब, सबसे जरूरी तो मोहनवा को धरना है....इस के गैंगवा  में तीन गो ए. के. ४७ पहुँचिये  गया है. ससुरा जेल में है, सो इस बार उ कौनो चानस नहिये लेगा..." 
          अभी कलुआ औरो बोलता लेकिन, साहेब बीचे में बोल पड़े," चुप धतुरवा, हम का कह रहे थे .....ई तो स्पीड़े  में ब्रेक कर देता है....हाँ, हम कह रहे थे कि मोहनवा अभी बहुत्ते   फास्ट चल रहा है. उ अभिये   से फास्टे फास्ट चलेगा इ हम सेंटे परसेंटे जानते थे. उसको जैसे भी हो हमको पंजियाना है...."    
          अनीति जी की बैठक भी गरमा-गरम चल रही थी, " इस बार भी हमरा स्लोगनवा रहेगा कि " गुंडा राजनीति  को जड़ से समाप्त करना है", और इसके लिए अंडरवर्ल्ड  में अपनी जड़ मजबूत होना बिल्कुल्ले जरूरी है.  इस लिए, पहले की तरह इस बार भी सभ्भे बाहुबलियों को सेट करिए लेना है. पिछली बार तो हम ५२ बाहुबलियों को टिकस्वा दिए थे, लेकिन  ई बार तो लाल सहेब्वा पितपिताये हुए है. उ अपना कुल्ले ताकतवा लगा देगा. अरे उ त मोहनवा को अभिये से पटा रहा है. हमको डिटेल में कुल्ले बाहुबलियों की लेटेस्ट रिपोर्ट चाहिए."
          अंडरबीअरवा झट  से बोला," साहेब हम तो जानबे करते थे कि  इहे प्रश्न में क्वेसचंवा उठेगा. से हे से हम तैयार हो के आये हैं. साहेब, चुनाव से पहिले कुल्ले नाल वाले नेतागण असलहवा के लिए खूब्बे जोर मारे हैं. किसी का बजेट दू करोड़  तो किसी का तीन करोड़ रहा है. मोहनवा हथियार खरीद में टौपे पर है. उसको तो हम भी कुछ हथियार सप्लाई किये हैं और खूब्बे पैसा टाने हैं. उ सालिडे पैसा लगाता है......" 
          अनीति जी जोर से हँसे और बोले, "अरे अंडरबीअरवा, तुमरा ई धन्धवा तो हम जानबे नहीं करते थे. तुम तो उस्तादे निकला. अब तुम्ही मोहनवा को  सेट कर के हमको रिपोर्ट करेगा. अरे हाँ, मीडिया वाले पूछ रहे थे कि आप कहते हैं कि  आप लाल साहेब का गुंडागर्दी  ख़त्म करेंगे लेकिन आप तो गुंडवन  से  सेट्टिंग - फेट्टिंग कर रहे हैं ?     
          हम तो खुब्बे हँसे और बोले , " आप लोगन पत्रकारिता करते हैं, और हम राजनीति करते हैं, ज़रा बूझिये, हम पिछले चुनावों में भी लाल साहेब की गुंडागर्दी पर कैसा छापा मारे थे ? उनका अस्सी परसेंट फ़ोर्सवन  हमरे पार्टी में चला आया था. तो उनका गुंडागर्दी ख़तम हुआ कि नहीं ? हम ऐसे ही  राज नहीं कर रहे हैं ? ई सुन के न, कुल्ले पत्रकारवन  के मुहे चुप हो गया! "

           विलास जी की बैठक भी खूब्बे जम रही  है," अरे तुम लोगन देखना हम दादा लोगन को कैसे सेट कर सबको चौंका  देते हैं. पिछली बार हमने ७४ दागियों को टिकट दिया था. उस बार भी हम इस मामले में फस्ट थे और इस बार भी फस्ट रहेंगे. कौनो चिंता करने की बात नहीं है. सब दागियों को पटाने जुटाने में लगे हैं और ई काम  तो हम पहिले से ही निपटा चुके हैं. रहा कुछ क्षेत्र में   पंजाबी वोट का मामला तो हमरी राम प्यारी काहे  के लिए है? ले आयेंगे दिल्ली वाली दुल्हनिया को! 

         "हम लोगन  तो आजादी के दीवाने रहे हैं, लेकिन, क्या करें बाबा कहते हैं कि ग्रैजुएट लोग को लेकर राजनीति  करो, बड़ा शर्म लगता है कि हम तो खुद्दे ग्रैजुएट नहीं  हैं न. लेकिन राजकुमार साहेब का आदेश है तो, पालन तो करना ही होगा. फिर भी कुछ जोगाड़ किये हैं. सौ दागियों में से  कम से कम बीस प्रतिशत तो हम लोगों को साथ देबे करेगा, काहें कि उनका भी मजबूरिये है, हमरा समर्थन करने का. जहाँ मोहनवा होगा, वहां उसका एंटी पार्टी तो होबे करेगा. हम लोगन को इसी फैक्ट्वा  का लाभ उठाना है. और जम कर सब बड़ा दादा लोगन की एंटी पार्टियों को पन्जिआइए  लेना है. लेकिन बाबा को इस बात की  भनक भी नहीं लगनी  चाहिए, नहीं तो मामले में खटाई पड़ जाएगा. 

          इस प्रकार सभी प्रमुख दलों ने तैयारी कर ली है दागियों के पटाने की लेकिन, कुछ दागी ऐसे भी हैं जो ज़रा इन्ड़ेपेंडेंट  ख्याल के हैं, सो उनका चुनावी ग्रामर ज़रा अलगे है. उ लोगन स्वतन्त्रे रूप से चुनाव में खड़ा होंगे और मौक़ा मिलने पर  पैसा ले के किसी तगड़े कैंडीडेट  के पक्ष में बैठ जायेंगे या वोट कटवा  कलायेंगे, लेकिन अपना प्रभाव  क्षेत्र तो बचा ही लेंगे!  

शुक्रवार, 23 जुलाई 2010

ये लोग बड़े धर्मात्मा हैं......सीबीआई से बेजोड़ घबराते हैं!

ये लोग बड़े धर्मात्मा हैं......सीबीआई से बेजोड़ घबराते हैं !
छटपटा गए हैं भगवाधारी! जिस दंगे के कारण उनको बहुत दिनों तक राज करने का मौका मिला, वही दंगा अब उनके गले का  फंदा बन रहा है. कभी कोड़ा कांड पर सीबीआई की मांग करते हैं और कभी उसी संगठन को  कांग्रेस का हथियार बताते हैं. वे यह भी भूल गए कि उनलोगों  ने कभी राजीव गाँधी को बदनाम  करने के लिए बोफोर्स मामला खड़ा किया था और उसकी सीबीआई जाँच करवा कर उसकी पुष्टि करने के लिए सीबीआई पर दबाव डाला था.
इस मामले में कथित घोटाले की कथित राशि से बहुत ही बड़ी राशी का ब्यय उनकी सरकार  ने  किया था.

सचमुच, भगवाधारी सीबीआई से बेजोड़ घबराते हैं. झारखण्ड में विधान सभा चुनाव के समय तो ये सीना फुला-फुला के मांग कर रहे थे कि कोड़ा कांड की जाँच सीबीआई से ही हो , लेकिन सत्ता में आने  के लिए शिबू सोरेन से गंठजोड़ कर लिया, ताकि कोड़ा कांड को सीबीआई जाँच से दूर रखा जा सके. सत्ता में आते ही न्यायालय में लिख कर दे दिया कि कोड़ा कांड में सीबीआई जाँच की कोई जरूरत नहीं है. वे भूल गए कि ये वे ही थे, जिन्होंने गला फाड़ -फाड़  कहा था कि कोड़ा कांड  की जाँच में शिबू सोरेन, लालू प्रसाद और कांग्रेस के नेताओं को भी अभियुक्त बनाया जाये और जाँच, किसी भी कीमत पर सीबीआई से ही कराई जाये. बड़े महान हैं ये लोग. बड़े सत्यवादी हैं ये लोग. बड़े धर्मात्मा हैं ये लोग. बस, इनको महात्मा गाँधी, जवाहर लाल नेहरु, राजेंद्र प्रसाद आदि कभी अछे नहीं लगे. इनको हिटलर, गोडसे जैसे लोग कैसे लगे, ये ही बता सकते हैं. पता नहीं, ये गोडसे के  अस्थि कलश पर कभी फूल माला चढाते हैं कि नहीं!

गुजरात में निर्दोष  लोगों पर हिंसा  बरपी गयी. निर्दोष लोगों का खून बहाया गया. मोदी जी ने खूब ड्रामेबाजी की. अडवाणी जी ने घडियाली आंसुओ की  धारा बहाई. लेकिन, बाजपेयी जी की इस मांग को उनकी पार्टी के सुप्रीम लोगों ने ठुकरा दिया कि मोदी जी को गुजरात के मुख्यमंत्री के पद से तुरंत हटा दिया जाये. अब तो मोदी जी को भगवाधारी अपना आईकोन मानते हैं. लेकिन, इस आईकोन को उनके सहयोगी दल के नेता महोदय नीतीश जी बिलकुल नहीं मानते हैं. नीतीश जी को लगता है कि बिहार में मोदी  जी के आने से उनके  मुस्लिम जनाधार का बंटाधार हो जाएगा. पर सवाल है कि मोदी जी के बारे में नीतीश जी ऐसा क्यों सोचते हैं ? वे क्यों सोचते हैं कि मोदी जी की छवि पक्के सांप्रदायिक की है ? क्या उनको गुजरात दंगे का सच मालूम है ? क्या उनको गुजरात दंगे के  शातीरों के नाम मालूम हैं ? अब इन प्रश्नों के उत्तर तो श्रीमान नीतीश जी ही बता सकते हैं, अगर वे अपने को सचमुच नीतिवान मानते हैं.

हाफ पैंटधारी बहुत परेशान हैं. गडकरी जी की  ताजपोशी के इतने दिन हो गए हैं, लेकिन वे एक भी भावनात्मक मुद्दा नहीं उठा पाए. हाँ, उनहोंने महंगाई  पर एक रैली  निकाली, जिसे मीडीया ने बहुत महंगा करार दे दिया.काली टोपी वाले में निराश हो गए हैं कि इतने  हेवीवेट  को गद्दी पर बैठाया, लेकिन वह तो सिर्फ बचकाना  बयान दे रहा है.

हाँ, भगवाधारियों के पास एक नेता है, जो रथ हांकने में माहिर है और घोर बुढ़ापे में  भी जिम जाता है. उनको एक बार फिर रथ पर बैठा कर मोदी जी के साथ बिहार की यात्रा पर भेजना चाहिए. उनके  रथ का नाम इस बार सीबीआई रथ होना ही चाहिए. यह  रथ गुजरात दंगों के आरोपियों  को राहत  दे न दे, लेकिन वह  देश में एक सांप्रदायिक नारा देने का  काम कर सकता है. नीतीश इस रथ को जरूर रोकेंगे और कम से कम मोदी जी को गिरफ्तार कर लालू जी की कमी को दूर कर देंगे!

भगवाधारीगण, बड़े पुण्यात्मा हैं. भगवान् ने उनसे  केंद्र की सत्ता छीन कर. उनके  परीक्षा देने का, लगता है फरमान जारी कर दिया है. पुण्यात्माओं को तो बार-बार परीक्षा देनी ही पड़ती है! वैसे, इन लोगों ने देश की  एकता और अखंडता की जम कर परीक्षा ली है और सदा लेते रहेंगे और हमारा देश उन सभी परीक्षाओं में पास होता ही रहेगा.