ये लोग बड़े धर्मात्मा हैं......सीबीआई से बेजोड़ घबराते हैं !
छटपटा गए हैं भगवाधारी! जिस दंगे के कारण उनको बहुत दिनों तक राज करने का मौका मिला, वही दंगा अब उनके गले का फंदा बन रहा है. कभी कोड़ा कांड पर सीबीआई की मांग करते हैं और कभी उसी संगठन को कांग्रेस का हथियार बताते हैं. वे यह भी भूल गए कि उनलोगों ने कभी राजीव गाँधी को बदनाम करने के लिए बोफोर्स मामला खड़ा किया था और उसकी सीबीआई जाँच करवा कर उसकी पुष्टि करने के लिए सीबीआई पर दबाव डाला था.
इस मामले में कथित घोटाले की कथित राशि से बहुत ही बड़ी राशी का ब्यय उनकी सरकार ने किया था.
सचमुच, भगवाधारी सीबीआई से बेजोड़ घबराते हैं. झारखण्ड में विधान सभा चुनाव के समय तो ये सीना फुला-फुला के मांग कर रहे थे कि कोड़ा कांड की जाँच सीबीआई से ही हो , लेकिन सत्ता में आने के लिए शिबू सोरेन से गंठजोड़ कर लिया, ताकि कोड़ा कांड को सीबीआई जाँच से दूर रखा जा सके. सत्ता में आते ही न्यायालय में लिख कर दे दिया कि कोड़ा कांड में सीबीआई जाँच की कोई जरूरत नहीं है. वे भूल गए कि ये वे ही थे, जिन्होंने गला फाड़ -फाड़ कहा था कि कोड़ा कांड की जाँच में शिबू सोरेन, लालू प्रसाद और कांग्रेस के नेताओं को भी अभियुक्त बनाया जाये और जाँच, किसी भी कीमत पर सीबीआई से ही कराई जाये. बड़े महान हैं ये लोग. बड़े सत्यवादी हैं ये लोग. बड़े धर्मात्मा हैं ये लोग. बस, इनको महात्मा गाँधी, जवाहर लाल नेहरु, राजेंद्र प्रसाद आदि कभी अछे नहीं लगे. इनको हिटलर, गोडसे जैसे लोग कैसे लगे, ये ही बता सकते हैं. पता नहीं, ये गोडसे के अस्थि कलश पर कभी फूल माला चढाते हैं कि नहीं!
गुजरात में निर्दोष लोगों पर हिंसा बरपी गयी. निर्दोष लोगों का खून बहाया गया. मोदी जी ने खूब ड्रामेबाजी की. अडवाणी जी ने घडियाली आंसुओ की धारा बहाई. लेकिन, बाजपेयी जी की इस मांग को उनकी पार्टी के सुप्रीम लोगों ने ठुकरा दिया कि मोदी जी को गुजरात के मुख्यमंत्री के पद से तुरंत हटा दिया जाये. अब तो मोदी जी को भगवाधारी अपना आईकोन मानते हैं. लेकिन, इस आईकोन को उनके सहयोगी दल के नेता महोदय नीतीश जी बिलकुल नहीं मानते हैं. नीतीश जी को लगता है कि बिहार में मोदी जी के आने से उनके मुस्लिम जनाधार का बंटाधार हो जाएगा. पर सवाल है कि मोदी जी के बारे में नीतीश जी ऐसा क्यों सोचते हैं ? वे क्यों सोचते हैं कि मोदी जी की छवि पक्के सांप्रदायिक की है ? क्या उनको गुजरात दंगे का सच मालूम है ? क्या उनको गुजरात दंगे के शातीरों के नाम मालूम हैं ? अब इन प्रश्नों के उत्तर तो श्रीमान नीतीश जी ही बता सकते हैं, अगर वे अपने को सचमुच नीतिवान मानते हैं.
हाफ पैंटधारी बहुत परेशान हैं. गडकरी जी की ताजपोशी के इतने दिन हो गए हैं, लेकिन वे एक भी भावनात्मक मुद्दा नहीं उठा पाए. हाँ, उनहोंने महंगाई पर एक रैली निकाली, जिसे मीडीया ने बहुत महंगा करार दे दिया.काली टोपी वाले में निराश हो गए हैं कि इतने हेवीवेट को गद्दी पर बैठाया, लेकिन वह तो सिर्फ बचकाना बयान दे रहा है.
हाँ, भगवाधारियों के पास एक नेता है, जो रथ हांकने में माहिर है और घोर बुढ़ापे में भी जिम जाता है. उनको एक बार फिर रथ पर बैठा कर मोदी जी के साथ बिहार की यात्रा पर भेजना चाहिए. उनके रथ का नाम इस बार सीबीआई रथ होना ही चाहिए. यह रथ गुजरात दंगों के आरोपियों को राहत दे न दे, लेकिन वह देश में एक सांप्रदायिक नारा देने का काम कर सकता है. नीतीश इस रथ को जरूर रोकेंगे और कम से कम मोदी जी को गिरफ्तार कर लालू जी की कमी को दूर कर देंगे!
भगवाधारीगण, बड़े पुण्यात्मा हैं. भगवान् ने उनसे केंद्र की सत्ता छीन कर. उनके परीक्षा देने का, लगता है फरमान जारी कर दिया है. पुण्यात्माओं को तो बार-बार परीक्षा देनी ही पड़ती है! वैसे, इन लोगों ने देश की एकता और अखंडता की जम कर परीक्षा ली है और सदा लेते रहेंगे और हमारा देश उन सभी परीक्षाओं में पास होता ही रहेगा.
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