मैं पहली तारिख को बहुत खुश रहता हूँ. इस दिन मुझको पंद्रह दिन के लिए वेतन मिलता है.शेष के पंद्रह दिन तो मैं अपने दिलेर दिल के साथ रहता हूँ,फकीरी में मस्त-"बदन से कबा सिर से चादर ले गई/जिन्दगी हम फकीरों से क्या ले गई."लेकिन, मैं एक तारीख़ तो पीछे मुड़ कर देखता हूँ कि देश दुनिया में क्या हो रहा है, अपने आप से बेफिक्र.
देखा, पाया और महसूस किया कि मेरे जैसे पुराने कार सेवक को यह पता ही नहीं चला कि कब राडिया देवी जी ने भाजपा नीत एनडीए शासन में मंदिर बनवाने के लिए जमीन हासिल कर ली,और दिब्य मंदिर का निर्माण कर लिया और २ स्पेक्ट्रम डील में भयानक सफलता भी हासिल कर ली. खैर, इस मंदिर के निर्माण में तो मैं कार सेवा करने का पुण्य नहीं उठा पाया लेकिन, जब मैं अपनी गरीबी दूर करने के लिए उस मंदिर में प्रार्थना करने का मन बना कर पहुंचा, तो गार्ड ने यह धमकी दे कर भगा दिया कि यहाँ सिर्फ २जी वाले ही प्रार्थना या पूजा कर सकते हैं. अब मैं दीन-हीन क्या करता, जब मेरे सामने ही बहुत से पत्रकारों को भी मंदिर में प्रवेश नहीं दिया गया.
मैं बहुत परेशान हूँ . मेरी बेटर हाफ ने मुझको अल्टीमेटम दे दिया है कि या तो पड़ोस के श्याम जी दलाल की तरह या फिर घनश्याम जी अधिकारी की तरह कोई बड़ा स्कैंडल करो या फिर चाय-काफी मांगना या सन्डे के दिन अद्धा के लिए रुपए मांगना बन्द कर दो. मैं गया था घनश्याम जी के द्वारे.लेकिन वहां तो काल की तरह सीबीआई के लोग उनका मकान घेर कर पता नहीं क्या कुछ कर रहे थे. बाद में पता चला कि घनश्याम जी को सीबीआई. वाले बड़े सम्मान के साथ कार में बैठा कर कहीं ले गए. यह जानने के बाद भी बेटर हाफ ने मुझको सुनाया,"देखा कि नहीं देखा,घनश्याम जी की शानदार फोटो आज के हर अख़बार में छपी है.उनकी बेटर हाफ कितनी खुश हैं.कह रहीं थीं कि अब साहेब को जेल में कितने दिन भी आराम करना पड़े, परिवार को तो उन्होंने सुपर ग्रेड का बना ही दिया. हसबैंड हो तो ऐसा."
यह साल अच्छा बीता. अखबार की कीमत वसूल हो गई. स्कैंडलों ने मुझे दफ्तर में टाइम पास के लिए अच्छे-अच्छे टापिक दिए. लेकिन दुःख इस बात का है कि हमारे देश के प्रधानमंत्री जी ने स्कैंडल पर हुई डिस्कशन में भाग ही नहीं लिया. सो डिस्कशन थोड़ी फीकी रह गई.आंकड़ों से सज नहीं पाई.फिर भी स्कैंडलों पर तो डिस्कशन नुक्कड़ वाली चाय की दूकान से ले कर उच्चतम स्तर तक चलती रही. डिस्कशन का स्तर,लोअर स्तर पर हाई रहा और हाई स्तर पर जरूर लो ग्रेड का रहा.फ़िर भी इस कड़ाके की ठण्ड में काफी गर्मी रही. दिल को बहुत ऊर्जा मिली, बहुत सुकून मिला.
एक और साल बीत गया, मस्ती में, फकीरी में, विवादों में, सपनों में टाईम पास करते हुए. मैं समय का शुक्रगुजार हूँ जो कभी रुकता नहीं, फिर भी कभी-कभी समय ठहर जाता है, जब रसोई घर खाली होकर मेरी जेब को ललकारता है. जब प्याज को देखने मात्र के लिए बाज़ार जाता हूँ और रो पड़ता हूँ.जब दाल की बोरी पर नज़र टिक जाती है और हटाने पर भी हटती नहीं है.और जब मुकेश अम्बानी जी के निवास महल को सिर उठा कर देखता हूँ,अपनी गरीबी के कद को जान लेता हूँ. समय तब भी रुका-सा लगता है जब, बिजली का बिल अँधेरे में पढ़ कर एक और एक नया कर्ज लेने का ख्याल आ जाता है.
पता नहीं, जब भी कोई स्कैंडल भाजपा जी उछलवाते हैं, वे खुद उसमें एक पार्टी बनते नजर आते हैं. बोफोर्स उछला तो हिंदुजा फंसता नजर आया. अब इधर राडिया देवी जी ने राजा और भाजपा के अनेक नेताओं के साथ-साथ कांग्रेस की नींद हराम कर दी है.राडिया देवी को शत शत नमन जिन्होंने विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र को अकेले ही लोक कर अनूठा करिश्मा कर दिया.उनका नाम फोर्ब्स पत्रिका की पावरफुल लोगों की सूची में सबसे ऊपर अंकित किया जाना चाहिए.

