शुक्रवार, 3 दिसंबर 2010

टेपवा झूठ बोले कौवा काटे...

             
          न्यूज जब प्राइवेट टीवी  चैनेल पर आना शुरू हुआ  तो बड़े घराने के लाडले-लाडलियां अचानक पत्रकार हो गए और लगे चैनलों  पर भौकियाने और पत्रकारिता  के सारे उसूलों को तार-तार कर दिया. अब तो समाचार ज्यादातर स्क्रोल में तेजी से भागते नजर आते हैं,  जबकि मेन स्क्रीन पर दूसर चैनलों से उधार लिया गया बासी माल दौड़ता रहता है, विशेष कमेन्ट के साथ. फ़िल्मी गोससिपबाजी भी खूब चलती है. ये जिससे चाहते हैं, उसीसे किसी हीरो या हिरोइन का टांका भिड़ा देते हैं. ये अच्छे जोड़ी मेकर हैं. ये अच्छे जोड़ी ब्रेकर भी हैं.
         बेवजह हर न्यूज को ब्रेक करने का दावा करने वाले न्यूज चैनलों पर नीरा राडिया के टेप लीक ने ब्रेक लगा दिया है. अब वे न्यूज ब्रेक करते हैं कि देखिए बरखा का खुलाशा, पहली बार आपके इस चहेते भंडाफोड़  चैनेल पर.....सारा का सारा टेप जाली है...सारा का सारा टेप बकवास है...ज़रा गौर से देखिए, बरखा की आँखों में, बरखा की बूँदें झलक रहीं हैं. इन घड़ियाली बूंदों में हैं सच्चाई, ईमानदारी, पत्रकारिता के उसूल.....बरखा पवित्र है...बरखा बरखा है....टेपवा  झूठ बोले कौवा काटे...काली नीरा से ना डरियो...मैं कोर्ट चली जाऊँगी तुम देखते रहियो...टेपवा  झूठ बोले कौवा काटे...
           फिर एक चैनेल ने प्रोग्राम सेट किया ताकि तीस तीसमारखाओं का दुग्धाभिषेक  किया जा सके..... सो लाइव के पहले नाटकबाजों  की तरह रीहर्सल कर लिया गया. फिर टेक वन, टेक टू....शुरू हो गया राग दुग्धाभिषेक.....बेचारी बरखा  बहुत खूबसूरत हैं सो सभी उनके पीछे ही पड़ गए हैं, जबकि नीरा जी ने तो तीस को सेट किया था....देखिए, बरखा का मासूम चेहरा... ..जानिए इनकी शराफत...सुनिए इनका सफाईनामा....देखिए इनका पत्रकारिता में सफ़रनामा....उन्होंने अपनी कलम से कितने तूफ़ान खड़े किए....और एक छोटा सा नामुराद टेप उनके पूरे कृतित्व पर कैसे भारी पड़ सकता है...बरखा नारी हैं और किसी अन्य नारी से उनका बातचीत करने का अधिकार कोई नहीं छीन सकता है- जो बरखा से टकराएगा वह चूर-चूर हो जाएगा....ऊंचे स्वर में सब उनकी जय बोल, जो कलम जला-जला लिखते हैं, चटपटा-मसालेदार...... ऊंचे स्वर में सब उनकी जय बोल.....!!! 
         बरखा जी बरखा जी, जरा बताएंगी  कि नीरा जी ने आपसे  क्या बात की? यह प्रश्न करते ही महोदय प्रश्नकर्ता जी ने स्वयं जवाब भी दे दिया-दुनिया जानती है कि आपने क्या बात की, लेकिन बात में ऎसी कोई बात नहीं थी कि यह साबित हो की आपने कोई खोता-पेटी लेने की बात की हो. आपने घरेलु बात की. चाय-कॉफ़ी पर बात की. मौसम की बात की. तीज-त्योहार की बात की...मुकेश अम्बानी और रतन टाटा जी के स्वास्थ्य की बात की...उनके इम्पायर की हलचलों पर बात की. यह सब बातचीत तो चलती ही रहती है....अगर आपने न्यूज फिक्सिंग की बात की होती या फिर संसद के फिक्सिंग की बात की होती  तो कोई अपनी ऊँगली उठा सकता था...आपको, बरखा जी, किसी बात की चिंता करने की क्या जरूरत है....         
       
                        

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