सोमवार, 29 नवंबर 2010

कांच के घर से पत्थरबाजी

        
         
     रतन टाटा हों या फिर भाजपा नेता अरुण शौरी, दोनों को मौका मिल गया स्पेक्ट्रम घोटाले पर बोलने का. रतन टाटा भ्रष्टाचार पर बड़ी बड़ी बातें करने लगे थे. लेकिन उसी समय राडिया से उनकी हुई बातों के लीक हो जाने के कारण उनकी और भाजपा की हालत गड़बड़ा गई है .अब भाजपा को शायद जेपीसी जाँच की मांग करते हुए अपने ऊपर भी खतरा नजर आता होगा.



             उधर, महोदय अरुण शौरी ने राजनाथ सिंह, अरुण जेटली और नायडू पर हमला बोल दिया है. लेकिन, इस हमले के लिए शौरी को बहुत देर इन्तजार करना पड़ा है. चलिए, स्पेक्ट्रम घोटाले के कारण दूध का छीका तो टूटा. बिल्ली का भाग जगा. जब शौरी जी संसद में मुकेश अम्बानी के खिलाफ आग उगलने की पूरी तयारी में थे, तभी राजनाथ जी और अडवाणी जी के इशारे पर उनकी जगह नायडू को खड़ा कर दिया गया. आखिर पूंजीपतियों की पार्टी है भाजपा और उसके नेता लोग अगर किसी पूंजीपति के खिलाफ शोध वक्तव्य देने लगेंगे तो भाजपा के चरित्र पर दाग नहीं लगेगा क्या? अवश्य लगेगा. यह बात अरुण शौरी को समझना चाहिए. लेकिन, क्या किया जाए अरुण शौरी को लगता है की वे पत्रकार हैं. जब कि पत्रकारिता के आदर्शों का उन्होंने शायद ही कभी पालन किया हो. लगता है, अडवाणी जी जब रथ ले कर पूरे देश में साम्प्रदाइकता का ताण्डव कर रहे थे, तब शौरी जी की कलम सूख गई थी. शौरी जी को कभी आरएसएस से प्यार हो जाता है तो कभी उसकी राजनीतिक शाखा पर गुस्सा आ जाता है. बात असल में यह है कि इनदिनों भाजपा में उनकी पूछ घट गई है. गडकरी जी तो उनके नाम से बिदक जाते हैं.

             पता नहीं, रतन टाटाजी को क्या जरूरत पड़ गई थी क़ि कांच के महल में बैठ कर भ्रष्टाचार पर प्रवचन देने लगे. कांच को आदत नहीं होती है, भ्रष्टाचार पर भाषण सुनने की. सो, उसका दरकना लाजिमी था और टेप के रूप में दरका गया. और टूटा हुआ कांच और टूटा हुआ हीरा जुड़ता नहीं है. अब टेप के प्रसारण पर रोक लगे या टेप लीक करने वाले को सजा मिले, उससे टाटाजी के माथे पर से बोली गयी बातों का बोझ तो उतरेगा नहीं. यह लीक भोपाल गैस लीक जैसा है. लेकिन, इस लीक से अडवाणी जी परेशान हैं. उनको बड़ी शर्म आ रही है. गजब हैं जनाब अडवाणी जी, उनको जिन्ना की जय करने में या गुजरात में नरसंहार होने पर शर्म नहीं लगी थी, लेकिन राजनीतिक फिक्सिंग के मामले में बड़ी शर्म लग रही है. दिल के किस कोने में उन्होंने अपनी प्यारी शर्म छिपा कर रखी थी? इस पर भी जेपीसी जाँच होनी चाहिए. अरे अडवाणी जी आपको जिन बातों पर शर्म करनी चाहिए उसकी सूची तो बड़ी लम्बी है, विश्वास न होतो अरुण शौरी ही आपको गिनवा देंगे.

























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