मेरा बैड लक मेरे फेवर में हो रहा है- मुझको बिग बौस से निमंत्रण मिल गया है.और मैं अब एक गाली-गुरु से गालियाँ सीख रहा हूँ. उनके उपयोग की मुकम्मल जानकारी ले रहा हूँ. जैसे कोई गायक रागों का अभ्यास सुबह- शाम करता है, मैं भी लगातार गालियाँ बकने का और उसमें अपने स्टाइल भरने की भी कोशिश कर रहा हूँ. मां, बाप, भाई, बहन तथा अन्य नातों से सम्बंधित गालियाँ तो मैंने कंठस्थ कर लिए हैं.
लेकिन, क्या बताएं यह समाज किसी की तरक्की देखना ही नहीं चाहता है. गालियों के स-स्वर रियाज से मेरे पडोसी बड़े बौखलाए हैं. कल तो सतीश जी ने तो हद ही कर दी. उन्होंने सपत्नी मेरे फ्लैट में आ कर मुझे चेतावनी देते हुए कहा कि उसके बेटे ने मेरे रियाज का लाभ उठाते हुए तेरह गालियां सीख ली हैं, जिनका वह अपने साथियों पर प्रयोग करते हुए पार्क में पिट चुका है. इतना ही नहीं वे मेरे फ्लैट से जाते-जाते मुझे कुछ स्पेशल बिहारी गालियां दे गए. लेकिन, मैंने उन गालियों को उनका फ्री उपहार मान कर स्वीकार कर लिया है.
पड़ोसियों की बेवजह नुक्ताचीनी के बाद, मैंने गालियों की प्रैक्टिस के लिए एक खंडहर पड़े मकान में जगह दूंढ ली है. मैंने शपथ ले ली है कि बिग बौस में मैं तहलका मचा कर ही दम लूँगा. लेकिन, मेरी राह में सिर्फ पडोसी ही नहीं, बल्कि घर के लोग भी बाधक बन रहे हैं. कल मेरे बड़े भाई ने मेरे फ्लैट में आ कर मेरी धर्मपत्नी से पूछा,' क्या बब्लुआ आज कल गालियां बकने की प्रैक्टिस कर रहा है ? क्या उसका दिमाग गड़बड़ा गया है ? क्या किसी दिमाग के डाक्टर से उसकी जाँच करवाई ? मैं बाथरूम में छिप कर दोनों की बातें गौर से सुन रहा था- धर्मपत्नी जी ने अधर्म के रास्ते पर चलते हुए बड़े भाई जी को बताया, " मैं पहले उनको किसी शैकोलोजिस्ट से दिखलाने की बात सोच रहीं हूँ , फिर बाद में कांके के मानसिक आरोग्यशाला में उनको भरती करवाने पर विचार करूंगी."
अब देखिये जनाब, मेरी धर्मपत्नी के कितने खतरनाक विचार हैं. अरे, हम तो बिग बौस में चमकने-दमकने जा रहे हैं, हरे-हरे नोट की माला पहनने जा रहे हैं, और यहाँ मुझको पागल समझा जा रहा है. बड़े भाई जी के जाने के बाद , मैंने अपनी धर्म पत्नी जी को बताया कि बिग बौस में सफलता और मालामाल होने के लिए गालियों का कितना विशाल महत्त्व है.
मेरी धर्मपत्नी जी हत्थे से उखड़ गयीं और बोलीं,' मैं बिग बौस देखती हूँ. बिग बौस में जाने के लिए गालियों के रियाज की क्या आवश्यकता है ?
मैंने उनको बताया,' देखो, जब बिग बौस के घर में कोई गाली बकता है तो उसके गाली-युक्त संवाद की रेकार्डिंग कर ली जाती है, लेकिन, बाद में गाली की जगह "पीं" की आवाज भर दी जाती है. अगर कोई प्रतियोगी गाली ही न बके तो उसके संवाद में "पीं" की आवाज नहीं होगी. लेकिन, क्या तुमने बिग बौस के किसी प्रतिभागी का संवाद बिना "पीं" की आवाज के सुना है ? जानती हो बिग बौस देखने वाले तो इन दिनों एक प्रतियोगिता करते हैं-पहचानो कौन सी गाली "पीं" की आवाज के नीचे दबी है. यह गेम बहुत पोपुलर हो गया है."
पत्नी जी ने और तेज आवाज में अपनी बात पेश की," देखो जी, आप कल सुबह तैयार हो जाईगा. आपको मैं शैकोलोजिस्ट के पास ले जाउंगी."
मुझे भी तेवर आ गया, " यह क्या बकवास है ? अरे तुम तो जानती हो कि मैं कभी गालियां नहीं निकाला करता हूँ. इन दिनों गालियों की प्रैक्टिस तो मैं बिग बौस में तहलका मचाने और माला-माल होने के लिए कर रहा हूँ. मेरा प्रोगाम है कि मैं बिग बौस प्रतियोगिता जीत कर तुम्हारे लिए सुन्दर और कीमती साड़ियों का जुगाड़ करूँगा."
मेरी पत्नी मेरे पास से उठ कर चली गई. और मैं सोचने लगा कि बिग बौस में जीत दर्ज करने का मेरा सपना क्या सपना ही रह जायेगा? क्या मेरे सपनों को वे लोग तोड़ देंगे, जिनके लिए मैंने पूरी जिन्दगी खट कर काम किया, कभी एक पेग शराब नहीं पी, कभी किसी को गाली नहीं दी और अपने दफ्तर के बौस की गालियां अनसुनी करता रहा ताकि मेरी नौकरी पर खतरा न आ जाए. और आज जब माला-माल होने के लिए मैं जीवन में पहली बार गालियों का रियाज कर रहा हूँ तो मेरे परिवार के लोग ही मुझको पागल समझ रहे हैं.
लेकिन, मेरे दोस्तो, आप जानते ही हैं कि बिना गालियों के बिग बौस का तो वजूद ही समाप्त हो जाएगा. अरे, गालियां हमारी संस्कृति के अंग हैं. शादी-ब्याह के अवसर पर हमारी घर की महिलाएं कितनी गालियां गीतों के माध्यम से सुनाती हैं. बाराती के सभी श्रेष्ठजनों को चुन-चुन कर गरमा-गरम गालियों से स्वागत करतीं हैं और बाराती के श्रेष्ट जन उन गालियों का लुफ्त उठाते हैं. बिग बौस कार्यक्रम भी हमारी संस्कृति के अनुसार गाली आधारित कार्यक्रम है. पर पता नहीं, सरकार भी भारतीय संस्कृति और इंटरनेश्नल गालियों से ओत-प्रोत बिग बौस कार्यक्रम को देर रात के समय शिफ्ट करना चाहती है. अरे, गालियां दिन में दो या फिर देर रात, उसके टेस्ट में कोई फर्क नहीं पड़ता है. गाली देना और सुनाना हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है. अभिव्यक्ति के संवैधानिक अधिकार से हमें कोई वंचित नहीं कर सकता है.
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