आम तौर से जब नेताओं, खास कर गोएबेल्स के चेलों को कुछ उलटी-सीधी बात को जनता में फैलाना होता है, तो वे किसी अपने खाश आदमी को बलि का बकरा बना कर, उससे अपनी बात मेमिया देते हैं. आरएसएस के पास बकरों की कमी नहीं हैं. जिन्ना का नाम लेकर गाँधी और नेहरू को नीचा दिखलाना था, तो आडवाणी जी को और जसवंत सिंह जी को बकरा बनाया और उनकी कलम से दो विष-युक्त किताबें लिखवा दीँ . एक ने तो अपनी किताबें पाकिस्तान में भी बेचीं . किताब बेचते हुए जसवंत जी को पाकिस्तान में 'प्यारे जसवंत भैया' वाली गज़ल भी बहुत अच्छी लगी. उन्होंने उस गज़ल को पकिस्तान में बार बार सुना और सुनते समय उनके मुखमंडल पर जो चमक दिखती थी, उससे यह नहीं लगता था कि वे कभी किसी धार्मिक समुदाय के विरुद्ध आग उगलने वाले आरएसएसवादी नेता रहे हों. वे तब विशुद्ध जिन्ना समर्थक लगे, जैसा कि उनके दल के वे नेता दीखते हैं जो आजादी के समय से लेकर आज भी सक्रिय हैं.
हाँ तो, बात चल रही थी कि आरएसएस के पास बकरों की कमी नहीं है. उसी बात को जारी रखते हुए बता दें कि उनका लैटेस्ट बकरा हैं, महामना सुदर्शन जी महाराज.
अब कांग्रेस, सरदार बल्लभ भाई पटेल की कमी को दूर करने की कोशिश करते हुए, उनके बताए रास्ते का अनुशरण किया और आरएसएस के कई लोगों पर आतंकी वारदात करने के इल्जाम में अंदर करवा दिया. अगर बल्लभ भाई पटेल कुछ वर्ष और जीवित रह पाते तो शायद देश के प्रधानमंत्री बन जाते और आरएसएस इतिहास बन जाता. लेकिन, देश के दुर्भाग्य से पटेल जी के जीवन का असामयिक अंत हो गया और आरएसएस को पनपने का मौका मिल गया, कभी जेपी के इस विश्वास के कारण कि क्रांति की अग्नि में तप कर एक दिन वे सोना बन कर निखरेंगे, तो कभी रामजन्म भूमि विवाद पर देशवासियों और श्रीराम को एक साथ धोखा दे कर. लेकिन इस संकट की घड़ी में बेचारा बना आरएसएस क्या करता ? सो सुदर्शन जी को कहा कि बोलो जो मैं तुम्हारे कान में कहता हूँ और वे बोल गए, सोनिया सीआईए की एजेंट हैं और राजीव गाँधी की हत्या के पीछे भी वे ही थीं. ऐसी अमर्यादित और काल्पनिक बातें ही तो गोएबेल्स के हथियार हुआ करते थे.
सो सुदर्शन जी ने मेमिया दिया और जैसा कि बकरों के मेमिया जाने के बाद होता है, आरएसएस ने अपने पूर्व के बकरों से सम्बंधित उसी पुराने वक्तव्य को दुहरा दिया, सिर्फ नाम बदलते हुए- यह सुदर्शन जी का व्यक्तिगत बयान है, आरएसएस का नहीं. ऐसा ही बयान तब भी दिया गया था जब बीजेपी के एक राष्ट्रीय अध्यक्ष को पूरी दुनिया ने घूस लेते हुए देखा था, वह भी प्रतिरक्षा के सौदा हेतु. लेकिन इसी फार्मूला पर कांग्रेस कहे कि आदर्श घोटाला अशोक चाहवान का व्यक्तिगत मामला है, या करुणा निधि जी कहें कि राजा के मंत्रालय का कथित घोटाला राजा का व्यक्तिगत मामला है, तो इसे आरएसएस या बीजेपी के नेता कतई नहीं मानेंगे मानेंगे. वे तो एक सुर में पूरी 'कांग्रेस चोर है, चोर है' का नारा हुआं-हुआं करते रहेंगे हैं.
तीन हजार वर्ग फीट के फ्लैट पर कथित रूप से अशोक चाहवान के सगों के कब्जे के मामले पर अशोक चौहान को कांग्रेस मुख्यमंत्री के पद से हटा देती है, लेकिन जिस नरेंद्र मोदी के शासन काल में हजार से अधिक लोगों को मौत के घात उतार दिया गया, गर्ववती महिलाओं के पेट चीर दिए गए, कितनो को जिन्दा जला दिया गया और उसे तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल जी के चाहने पर भी मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को हटाया नहीं गया क्योंकि वह तो बीजीपी के असली चेहरा बन चुके थे, कहीं कोई अपने असली चेहरे को हटा सकता है?
लेकिन, सुदर्शन जी ही शायद बंद कमरे में रियाज कर रहे थे- अजी मैंने ऐसा तो नहीं कहा था.... ये प्रेस वाले कुछ का कुछ लिखते-दिखाते रहते हैं, कभी वरुण को हाथ काटने की धमकी देते दिखा-सुना देते हैं, तो कभी बीजेपी के अनेक सांसदों को प्रश्न के बदले पैसे लेते दिखा देते हैं.....इन प्रेस वालों पर कोई कैसे विश्वास कर सकता है....सब के सब कांग्रेसी सीबीआई हैं....एक हमारे ज़माने में सीबीआई थी, वह हमारे गढ़े बोफोर्स कांड की जाँच पर घोटाले से चौगुनी रकम खर्च कर भी किसी को दोषी नहीं ठहरा पाई और इधर हमारे लोगों ने जैसे ही एक दो धमाके कर दिए तो सबूत के साथ हाजिर हो गई कांग्रेसी सीबीआई...... उधर कान में एक आवाज आई- सो फाइनली सुदर्शन जी बोलेंगे कि मेरे वक्तव्य के तोड़-मरोड़ के पीछे कांग्रेस का पंजा है, सीबीआई का हाथ है, प्रेस का हाथ है!

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