शुक्रवार, 19 नवंबर 2010

राजा स्वयं को थ्री डी स्पेक्ट्रम में देख रहे होंगे!

         राजा की राजगद्दी छिन गई. अब कोर्ट का चक्कर लगायेंगे. लेकिन एक बात है राजा जी लम्बे समय तक चर्चे में रहेंगे. और राजनीति की मान्यता है की गुमनामी से बदनामी बेहतर होती है. सो राजा तो बल्ले-बल्ले होंगें ही. स्वयं को  थ्री डी स्पेक्ट्रम में देख रहे होंगे. अब टू जी स्पेक्ट्रम पीछे रह जायेगा और राजा का थ्री डी स्पेक्ट्रम हर दिन समाचार में छाया रहेगा. कुल मिला कर वे एक उम्दा इतिहास बनायेंगे. उनके बाल-बच्चे अपने बच्चों को राजा जी के कारनामों के किस्से सुनायेंगे और कहेंगे कि यह वही व्यक्ति थे जो मनमोहन जी की पैनी नजरों के नीचे कितना ऊँचा-नीचा काम कर के दिखा दिया.
       यह राजा जी का ही कमाल है कि वे सारे घोटालों को मात देने कि स्थिति में आ गए हैं. पता नहीं उनके घोटाले की पूरी राशि का व्योरा कब तक मेलेगा या फिर सारा व्योरा किसी फ़ाइल में कैद हो कर रह जाएगा? आशा है कि हमारे जीवन काल में किसी दिन वह घड़ी आएगी, जब हमें राशि का डीटेल मिलेगा  और गिनीज बुक ऑफ़ रिकार्ड में वह दर्ज होगा. हे ईश्वर! उसके पहले कोई और बड़ा घोटाला न कर दे, मैं इसकी प्रार्थना करता रहूँगा . यह घोटाला मील का पत्थर बनेगा. लोग इसकी कहानियां  सदियों-सदियों तक सुनाएंगे.
            लेकिन, राजा जी से कुछ प्रश्न करने की जुर्रत कर रहा हूँ-यह सब अकेले किया या किसी और का भी सहयोग लिया ? क्या कभी आप लालू जी से भी मिले और उनको अपना गुरु तो नहीं बनाया ? क्या आगे चल कर घोटाला-कला को और विकसित करने के लिए कोई संसथान खोलने का तो इरादा नहीं रखते हैं ?
           इधर सोनिया जी ने लेन-देन और लालच-वालच पर मनमोहन जी को सामने  बैठा कर पुरजोर लेक्चर जड़ दिया है. राजा के कारण अर्थशास्त्री  जी  बड़ी मायूस दिखे. वे कोई सीबीआई तो हैं नहीं कि किसी मंत्री की साजिश को पहले से ही भांप लें. 
         अरे, सीबीआई भी तो घोटाला-घटना संपन्न हो जाने के बाद ही छानबीन करती है. और अधिकांश केसों का अंत सीबीआई की विफलता से संपन्न हो जाता है और शेष रह जाता है घोटाले का जिन्न. यह जिन्न देश भर में मंडराता रहता है और सत्ताधारी दल के सिर पर चढ़ कर बोलता है. कभी यह एमपी साहबों  को प्रश्न के बदले घूस लेना सिखलाता है, कभी किसी दल के अध्यक्ष को डिफेंस सप्लाई के मामले में घूस लेने के लिए मजबूर कर देता है, कभी किसी नेता को जानवर का चारा तो कभी आदमी का अनाज चट करने लिए तैयार कर लेता है, कभी किसी को लाइबेरिया में खदान खरीदने के लिए उकसा देता  है और वह अपने राज्य को लूट लेता है, कभी ताबूत खरीद में बड़े साहब से घोटाला करवा देता है......आदि-आदि....
             यह ज़माना बहुत ही खराब है, कोई कमाने लगता है तो उसे देख कर कोई जलने लगता है. कोई किसी को खाकपति से अरबपति बनते देखना ही नहीं चाहता है. अब टाटा या बाबा रामदेव से कोई घूस मांगता है तो सालों बाद उसका प्रकटीकरण मुहूर्त देख कर करते हैं. पता नहीं, जब घूस की याचना होती है तब उनकी जुबान पर ताला क्यों लग जाता है.    इसके पीछे है  घोटालों  का जिन्न  जो, समय पर ईमानदार लोगों  के मुह पर चुप्पी देवी को  बैठा देता है. समय बुरे लोगों के पक्ष में है और जो अच्छे लोग हैं उनको बुरे लोग पोंगा पंडित कहने से चूकते नहीं हैं.   
                   
             

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