रांची में संघ से स्वयंसेवकों ने बहुत दिनों के बाद अपने तेल सेवित लाठियों का कांग्रेसियों पर संचालन किया.बेचारे कांग्रेसी निहत्थे ही सुरदर्शन जी का पुतला जलाने के लिए रांची के अलबर्ट एक्का चौक पर जा रहे थे और दूसरी ओर पुतले के संरक्षक संघियों ने, अपनी- अपनी लाठियों के साथ लैस, उनपर हमला कर दिया. सुदर्शन जी का पुतला जलने से बच गया. काश यही बहादुरी गुजरात के संघियों ने दिखलायी होती, तो कितने ही ईश्वर निर्मित आदमी की जानें बच जातीं. कितनी ही गर्ववती महिलाओं के पेट नहीं चीरे जाते.
लेकिन, चलिए संघियों को जीवित आदमी की परवाह हो न हो, उनको एक निर्जीव पुतले पर तो तरस आया! लगता है कि उनके पास अभी भी दिल शेष है, जिसने भले लोगों और निर्दोषों की जगह अपनों के प्रतिकृति-पुतलों पर तो प्यार बरसाया और उसके दुश्मनों पर खुले दिल से लाठियां तो भांजी. लगता है कि वे अब संघी मानसिकता से भटक रहे हैं. इनको जरूर नागपुर के बूढ़े बाबा की जोरदार फटकार लगनेवाली है.
कुछ संघियों के मालेगांव और अन्य जगहों पर हुए बम विस्फोटों में अंतर्लिप्ततता के कारण सीबीआई के द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद राहुल गाँधी ने संघ को आतंकी कह दिया, तो आरएसएस के लोगों का भी अपनी गोएबेल वाली नीति पर आरोप गढ़ने का पक्का हक़ बनता है. सो, उसी हक़ के आधार पर सुदर्शन जी ने कुछ निराधार कह दिया तो ये कांग्रेसी सुदर्शन जी का पुतला जलायेंगे ? उनका काम वे करेंगे? हिंसा उनका जन्मसिद्ध अधिकार है. और इस अधिकार की रक्षा के लिए ही वे अपने दफ्तर में अपने कार्यकर्ताओं का कोई लेखा-जोखा नहीं रखते ताकि किसी कांड में पकड़े जाने पर संघ उनको अपने से असम्बद्ध बता सके.
संघ के द्वारा बदनामी से बचने का पुख्ता इन्तेजाम रखा जाता है. लेकिन, जबसे अफवाह फ़ैलाने के लिए जिन्ना के नाम का इस्तेमाल कर महात्मा गाँधी को नीचा दिखने की नीति के लिए, जसवंत सिंह का प्रयोग सफल हुआ, तबसे संघ इस तरह का रिस्क लेने लगा है. उसी का प्रतिफल है सुदर्शन जी की असुदर्शन वाणी में सोनिया जी की बेबुनियाद तकरीर.
बेबुनियाद तकरीर ही तो उनका हथियार है. कोई अपने आप को अपने हथियार से कैसे अलग कर सकता है? सवाल है पहचान की रक्षा की. और संघी अपनी पहचान कभी मिटते हुए नहीं देख सकते हैं. हाथ में तेल पिजायी लाठी, सिर पर काली टोपी, हाफ पैंट आदि और फिर वे शान से कहते हैं -हम गणवेशधारी हिन्दू हैं. और जो ऐसा वेश धारण नहीं करता, वेद देख लो, वह हिन्दू कहलाने लायक ही नहीं है. उनके वेद में हिन्दुओं का यही ड्रेस कोड लिखा है तो लिखा है, और यह ड्रेस कोड सभी हिन्दुओं को मानना होगा, अन्यथा उन्हें गैर हिन्दू या धर्मनिरपेक्ष भ्रष्ट हिन्दू की संज्ञा दे दी जायेगी. उनके लिए स्वर्ग के द्वार बन्द करवा दिए जायेंगे. वही हिन्दू स्वर्ग जाने का अधिकारी माना जा सकता है जो संघी ड्रेस कोड को फौलो करता है.

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