गुरुवार, 23 दिसंबर 2010
इस वर्ष मैं राडिया मंदिर के निर्माण में कार सेवा करूंगा !
मैं जब भी महीना का अंतिम दिन पार करता हूँ सभी धर्मों के ईश्वर को याद करता हूँ और कहता हूँ कि हे भगवान् आपने एक और महीना पार कर दिया. और जब कभी दिसम्बर का महीना पार कर जनवरी में पहुँचाना होता है, तो महीना और साल दोनों पार करना होता है. यह और भी कठिन होता है. बीता हुआ पूरा साल याद आने लगता है. भूत काल में जाते हुए मैं तो कांप-कांप जाता हूँ. लगता है कि एक साथ अनेक भूत मेरे चारों ओर खड़े हो गए हैं और मेरी बची हुई लंगोटी ले कर भाग जाना चाहते हैं. फिर भी मैं सबको मुस्कुराता हुआ हैप्पी न्यू ईयर, कहता हूँ ताकि वे भी मुझे हैप्पी न्यू ईयर कह सकें.
नेता सेवक लाल मुझसे सेवा मांगता नजर आता है. अधिकारी मुझे अधिकार दिखाता नजर आता है. जज साहब मेरे खिलाफ फैसला देते नजर आते हैं-इस कंगाल ने सौ रुपए की लूट की है. मेरा ही वकील मेरे खिलाफ दलील देता नजर आता है. नरेगा की रसीद पर मेरा अंगूठा ब्लौकाधिकारी जबरन ले जाता है और मैं मजदूर के रूप में ट्रेन से दूसर राज्य में रोजी-रोटी कि तलाश में जाता हुआ नजर आता हूँ. मुझे ट्रेन में जब भी झपकी आती है, मुझे बाल ठाकरे और राज ठाकरे की लाठियां और मेरी घायल पीठ नजर आती है.
क्या करूँ, मैं तो भूत काल में जाते हुए डरता हूँ. जेल में आराम फरमा रहे हमारे कुछ महान नेता लोगों से मुझे ईर्ष्या होने लगती है.काश मैं भी बस एक बार नेता बनता और लूट मचाता और जेल में आराम फरमाता. वहीँ चैन से नववर्ष मनाता. लेकिन अपनी किस्मत में तो रोज खटो और रोज खाओ वाली नौबत है.
मेरी पत्नी ने कई दिनों से शोर मचा रखा है कि एक मोबाईल कर्ज ले कर भी खरीद लाओ और राडिया देवी से गपियाओ, दुःख के दिन बीत जायेंगे. बारहवाँ कर्ज लिया और मोबाईल ले आया, लेकिन क्या बताऊँ, जब भी राडिया देवी को फोन लगता हूँ जवाब आता है-नीरा मैया का मोबाईल ऑफ है, उनसे अभी आपका संपर्क नहीं हो सकता. उस शक्तिरूपेण राडिया देवी ने फोन क्यों बन्द कर रखा है, जो पक्ष और विपक्ष, सबको खरीद कर विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र को बौना कर सकती हैं, मेरी समझ में नहीं आ रहा है. हमारे यहाँ तो जेल के साधारण कैदी भी जेल में मोबाईल रखते हैं और सुरक्षित जेल से रंगदारी उगाही कर लेते हैं. उनका मोबाईल कभी ऑफ होता नहीं है, फिर राडिया देवी का मोबाईल क्यों ऑफ हो गया? इसके पीछे जरूर किसी जाँच एजेंसी की साजिश है, जो हम जैसे ग़रीबों को उनसे दूर रखना चाहती है, ताकि कोई गरीब कभी अमीर न बन पाए. बहुत नाइंसाफी है.
सो नव वर्ष पर मैंने राडिया देवी को बड़ी मेहनत से चिट्ठी लिखी है. साथ में भूतहा बाबा से दस रुपए का ताबीज भी खरीद कर डाल दिया है- भूतहा बाबा बचाएँ राडिया देवी को सीबीआई की काली नजर से. मैंने उनको बहुत दिल छूने वाली चिट्ठी लिखी है- हे राडिया देवी! सादर प्रणाम. मेरे गाँव में हम मजदूरों की दलाली कर हमें दूसर राज्यों में मजदूरी दिलाने वाला फेमस दलाल पिंटू ,आपका मंदिर बनवा रहा है....मैंने दलाल पिंटू से खुद जा कर कहा है कि मैं उस राडिया मंदिर के निर्माण में कार सेवा करूंगा. मैं जानता हूँ कि आप अपने परम भक्त दलाल पिंटू को दर्शन देंगी और तब हे देवी मुझे बस अपनी एक झलक ही दिखला देना. आपको लड्डू चढ़ाऊंगा . कवि हूँ सो आपके नाम पर राडिया चालीसा लिख डालूँगा, ताकि सारे ग़रीबों का आपकी कृपा से उद्धार हो सके. जय, जय राडिया देवी!
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें