शुक्रवार, 22 अक्टूबर 2010

सबके सब एक दूसर को नंगा-अधनंगा कर रहे हैं

          बिहार में  चुनावी राजनीति का पारा सातवें  आसमान  पर है. नेतालोग एक दूसर पर बेरहमी से आरोपों की बरसात  कर रहे हैं. जनता बहुत खुश है कि  सबके सब एक दूसर को नंगा-अधनंगा कर रहे हैं. लेकिन, लालू जी को बड़ी चिंता चिंता यह है कि नीतीश को रोकें कि राहुल को. बेचारे छटपटा रहे हैं.  उनका दिमागे नहीं काम कर रहा है. पहले से  उनको राहुल फैक्टर  के बारे में कोई खाश अंदाज नहीं था. लेकिन, जो पहले चरण के चुनाव में दिखा वह चिंताजनक है.
          वैसे, नीतीश जी कम परेशान नहीं हैं. उनको भाजपा के नेताओं के भाषणों से परेशानी है, क्योंकि  वे घुमाफिरा कर साम्प्रदाइक बात परोस रहे हैं. दूसरी ओर, कांग्रेस सेंधमारी  कर रही है.
           राहुल सेन्ट्रल फंड  का हिसाब मांग रहे हैं, और हिसाब-किताब रखने का काम तो बिहार में कब से बंद पड़ा है. उनको तो सिर्फ नरेंद्र मोदी के द्वारा भेजे गए पैसे के हिसाब से मतलब था, जिसको लौटा कर उन्होंने अपने आप को सेक्यूलर साबित करने का प्रयास किया है. यह उनके जीवन का सबसे बड़ा साहसिक कदम था. इस लोहियावादी ने साबित कर दिया कि वह भाजपा के दलदल में रहने के बाद भी बिल्कुल साफसुथरा है. पांच सौ प्रतिशत सेक्यूलर है.
        आज हर कोई अपने आप को सेक्यूलर साबित करने पर तुला है. अब आडवाणी जी बिहार आये और बोले कि हमारे नरेन्द्र मोदी जी आकंठ सेक्यूलर हैं, लेकिन क्या करें उनके खिलाफ प्रचार ज़रा गलत हो गया.
      मोदी जी के प्रचार आइटम  से क्रोधित हो कर नीतीश जी ने भी उनके खिलाफ कुछ गलत प्रचार कर दिया. उनको और उनके कदम चिन्हों पर चल रहे वरुण गाँधी को भी बिहार दौरे से अलग कर कुछ ज्यादा ही गलत प्रचार कर दिया. वर्ना मोदी जी तो सच्चे सेक्यूलर हैं. अब इससे अधिक दुःख कि बात क्या  हो सकती है कि मोदी जी कि  छवि सिर्फ गलत प्रचार के कारण ख़राब हो गई है. ये अखबारवाले भी बड़े वाहियात हैं. जो मन में आता है अखबार में मोदी जी के नाम पर छाप देते हैं. बेचारा सच्चा सेक्यूलर सिपाही साम्प्रदाइक  घोषित हो गाया है.  
             वैसे,आडवाणी जी   भी कुछ कम  सेक्यूलर नहीं हैं और चर्चा है कि इस बार शायद वे मस्जिद बनवाने के लिए रथयात्रा का प्रोग्राम बनायेंगे....उनको किसी  भी हालत में बस एक बार प्रधानमंत्री बनना है. इस दिशा में उन्होंने जिन्ना  साहब की तारीफ़ में क्या क्या नहीं किया. उनके चेले जशवंत जी भी ने जिन्ना भक्ति पर किताब  लिख डाली. जशवंत जी तो पकिस्तान में तो काफी पॉप्यूलर हो गए, लेकिन अब देखना है कि गुरु चेले कि जोड़ी अपने नए इमेज  को  भारत में  कितना भुना पाती  है.  

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