शनिवार, 18 सितंबर 2010

अर्जुन साहब पहले किसका सूखा दूर करेंगे?

अर्जुन साहब फिर एक बार मुख्यमंत्री बन गए हैं. शपथ ली है कि सूखा राहत कार्य पर पूरा ध्यान देंगे. लोग छटपटाए  हुए हैं, यह जानने के लिए कि वे पहले किसका सूखा दूर करेंगे. अपना, गडकरी जी का कि गाँव के ग़रीबों का. आम तौर से तो झारखण्ड का रिवाज है कि नेता लोग अपना सूखा दूर करने पर ही सारा ध्यान लगा देते हैं.

क्या मुंडा जी झारखण्ड  की परम्परा को तोड़ेगें ? परम्परा को तोड़ना आसान नहीं होता हैं, और फिर मुंडा जी की पार्टी परम्पराओं को  तोड़ने में विश्वास ही नहीं रखती है. देखिये, अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का, उनकी पार्टी का वादा हर चुनाव में दुहराने की पार्टी की परम्परा है, और पार्टी  उस ,पर आज भी कायम हैं, और जब तक यह सूरज चाँद रहेगा, उनकी पार्टी इस परम्परा को सदा कायम रखेगी  . राम भी इस बात को समझ गए हैं कि  मुंडा जी की पार्टी उनको सिर्फ मंदिर या मूर्ति के रूप में देखती है. राम  नाम के सिक्के के बिना उनकी पार्टी चल ही नहीं सकती. एक बार इस सिक्के से ज़रा सा डगमगाए कि  सिक्का ही नाकामयाब हो गया. बकौल भाजपाई पत्रकार अरुण जी के अनुसार वह राम नाम का सिक्का नहीं, बन्दूक की गोली थी जो, दो बार फायर नहीं की जा सकती है. खैर, विज्ञानं का युग है और कारतूस को रियूजैब्ल  बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे, ऐसा सबका विश्वास है.

मुंडा जी ने सबसे अच्छा काम यह किया है कि बिना राम या कृष्ण के बारे में विचारे, सर संघ चालक और  गडकरी जी का आशीष लेने के लिए नागपुर उड़ गए हैं. आखिर सरकार का और उनकी पार्टी का संचालन नागपुर वाले बाबा के आदेश निर्देश  से ही तो होने वाला है. गडकरी तो थोपे हुए नेता हैं और सर संघ चालाक तो सर्वोच्च शक्ति के स्वामी हैं. सो वे नागपुर पहुँचते ही आशीष ग्रहण करेंगे और आदेश-निर्देश  पर चलने की शपथ लेंगे. वही शपथ तो फलदायक होगा. नागपुरवाले बाबा खुश तो अर्जुन बाबा खुश.

सबसे तारीफ़ के काबिल तो सोरेन जी के पुत्र जी हैं, जिन्होंने अपने पिताश्री को मुख्यमंत्री पद से विस्थापित कर मुंडा जी को मुख्यमंत्री बनाने के लिए क्या  कुछ नहीं किया. अर्जुन जी के सुखार में हेमंत ऋतु ला दिया. भगवान करें  सोरेन-जुनिअर के घर आँगन में सुखार ख़त्म हो जाये. सावन भागों बरसे.

2 टिप्‍पणियां:

  1. सबसे तारीफ़ के काबिल तो सोरेन जी के पुत्र जी हैं, जिन्होंने अपने पिताश्री को मुख्यमंत्री पद से विस्थापित कर मुंडा जी को मुख्यमंत्री बनाने के लिए कया कुछ नहीं किया.

    कलयुग है भाई .....या शायद इसे ही राजनीती कहते है ...

    इसे भी पढ़कर कुछ कहे :-
    (आपने भी कभी तो जीवन में बनाये होंगे नियम ??)
    http://oshotheone.blogspot.com/2010/09/blog-post_19.html

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