सोमवार, 20 सितंबर 2010
जब तक राज करेंगे सिर्फ माई के नाम के नाम पर करेंगे
लाल साहेब को अचानक भूराबाल की चिंता सताने लगी. चट-पट बोले, "सारी नौकरिया में भूरा बाल को दस परसेंट देंगे, लेकिन ओ भूरा बाल कभी कुर्सी की ओर नहीं लपकना...लपकने का एकाधिकार सिर्फ मेरे पास है....एक बार गलती से मिस्टेक हो गया ओर "माई' नाराज हो गई और हमरा राज हमरे पैर के नीचे से खिसक गया...उधर रेल से हम डिरेल हो गए, इधर मैडम soniyaa के पास से हमरा इनडाईरेक्ट रूलवा ख़तम हो गया. कुल्ले फिनीश हो गया, लेकिन इस बार कौनो हमको हराने की बात सोच रहा है, तो उससे फूलिश और कौन हो सकता है..अरे जब हम अपना दुश्मन नंबर एक पासवान जी को पटा ले सकते हैं, तो वोटर को पाटने में हमको केतना देरी लगेगा ...माना कि हमारे पास सरकारी फंड नहीं है, सरकारी गाडी घोड़ा नहीं है, सरकारी प्रचार तंत्र नहीं है, लेकिन मेरे साथ अब 'माई' है, समझे कि नहीं समझे...
अरे, आप क्या समझते हैं कि हम नौसिखुआ खेलाडी हैं, क्या जो भूराबाल को दस परसेंट नौकरी हमरे हाथ से भेंटा जाएगा ?अरे, हम जब तक राज करेंगे सिर्फ 'माई' के नाम पर वैकेंसी निकालेंगे, बूझे कि नहीं? हमरी माई को थोड़ा भी घबराने की जरूरते नहीं है. बस हमको 'माई' की चोंटी पकड़ के कुर्सी पर बैठना है, फिर खेला शुरू.......
खेला शुरू का मतलब का मीनिंग समझे कि नहीं? का समझिएगा, कभी राजनीति में आप लोगन पालिटिक्स किये हैं ? हम जनता हूँ राजनीति में पालिटिक्स करना....हम पर आँख, कान और नाक बंद कर के विश्वास कीजिए, आपका कुल्ले चिंता-फिनता हम डाउन लोड कर देंगे. हम जो चालीस परसेंट लेंगे, उसमें दस परसेंट किसका होगा? और किसका होगा, अरे आपका होगा...घी का दिया जलाईयेगा अपने घर-दूरा में, समझे कि नहीं कि अभियो धतुरवा की तरह सोचियेगा.....
जो जो लोगन ई सोच के चला है कि उसकी सरकार का इस बार रीन्यूवल हो जाएगा उ लोगन दिन में सपना देखने वाले लोग हैं. अरे उ लोगन तो आदमी का चारा खा गया है. उनको तो बड़ा पाप लगेगा. जनता के बीच का पब्लिक थोड़े नहीं समझेगा कि बिहार को लूटने के लिए, मेरे खिलाफ केतना केतना षड्यंत्र किया और केतना केतना आरोप का बरसात किया...लेकिन हुआ क्या? अरे आज भी हम पासवान जी को छोड़ कर सभी दल के खिलाफ मोर्चा ले रहे हैं और उड़न खटोला में उड़ रहे हैं.
कुछ लोग कहता है कि मेरे राजद से बहुते नेता लोग भाग रहे हैं जैसे डूबते, जहाज से चिड़ियाँ लोग फुर्र से उड़ जाते हैं. अरे कौनो नेता हमरे दल से बाहर नहीं निकला है, काहे कि हम ही अपने दल के एक मात्र नेता हैं और बाकि तो चिरकुट हैं. अब देखिये मेरे सालों को भी लोग नेता मानते हैं. लेकिन मेरे साले को किसने नेता बनाया? अरे, हमने अपनी राबरी को मुख्यमंत्री जरूर बनाये, लेकिन नेता नहीं. फिर अपने साले को हम काहे नेता बनायेंगे? उ कौन होता है मेरे दल में रह कर नेता बनने वाला? हमरे दल में उसी को रहने का खुला अधिकार है, जो नेता नहीं है और बस मेरा फालोवर है, समझे कि नहीं?
हमको नीतीश जी पर भी हँसी आती है. उ कहते हैं कि हम फिनीश हो जायेंगे. लेकिन भाजपा के नेता नरेंद्र मोदी के बिहार आने के नाम से ही डर के मारे छटपटाए हुए हैं. यानी मोदी आये, तो नीतीश फीनीश हो जायेंगे. का बात का इतना डर रहे हैं नीतीश? मोदी कौनो बाघ हैं या कि उ कौनो शिकारी हैं कि बन्दूक ले के आयेंगे और यहाँ फटफटा दाग देंगे? नीतीश दू बार जनता को धोखा दे चुके हैं और हम रेल मंत्री के रूप में असली गुरु बन के सबका मन जीत चुके हैं. हम कहता हूँ इस बार चुनाव भी हमही जीतेंगे.
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