शुक्रवार, 20 अगस्त 2010
भारत में गोएबेल्स के बन्दों पर एक छोटा सा फ़साना
इन दिनों राजनीती में इतिहास गढ़ने वालों की संख्या बड़ी तेजी से बढ़ रही है. जसवंत जी ने जिन्ना का इतिहास गढ़ दिया तो पहले भाजपा ने उनको कुछ दिनों के लिए इतिहास बनना दिया और फिर स्वागत कर के ले आये वापस, क्योंकि उनके जैसा इतिहास गढ़ने वाला और दूसरा अभी उनकी पार्टी में है ही कहाँ. इतिहास गढ़ने के लिए जिगर होना चाहिए. उपने गढ़े हुए इतिहास को पाकिस्तान या विदेशों में बेच की कला होनी चाहिए.
जिनका अपना इतहास बहुत काला रहा हो, उनके लिए दूसरों के सच्चे इतिहास को झुठलाने की जरूरत होती है. झूठा इतिहास लिखने के लिए बहुत मेहनत करनी होती है. गोएबेल्स महोदय को अपना ईश्वर मानना पड़ता है. झूठे इतिहास और प्रोपगंडा करने की कला का भीषण प्रचार गोएबेल्स महोदय ने किया था. उनका कहना था कि आप एक झूठ सुबह से बोलना शुरू करें तो, शाम तक आपको स्वयं लगने लगेगा कि आप सच ही बोल रहे हैं. सो इतिहास गढ़ने वालों ने गोएबेल्स के मंदिर अपने काले दिल में बनाने शुरू कर दिए. और अब गोएबेल्स की पूजा करना वे अपना पहला धर्म मानते हैं.
एक महोदय ने पहले सरदार बल्लव भाई पटेल पर रिसर्च कर डाला और उनको नेहरु का पक्का विरोधी साबित करने की कोशिश की. उनके संगठनों ने उनका जन्म दिन और जयंती मानना शुरू कर दिया. और जन्म दिन मानते हुआ या फिर जयंती मानते हुए, नेहरू की छवि धूमिल करने के लिए, गोएबेल्स के मन्त्रों का प्रयोग शुरू कर दिया. लेकिन, एक दिन एक साधारण व्यक्ति उनसे पूछा," महोदय, मेरी समझ में नहीं आता कि आप सरदार बल्लभ भाई पटेल की इतनी तारीफ़ करते हो, जब उन्होंने ही आपके संगठन को दो बार प्रतिबंधित करने का काम किया था. क्या आप इसे स्पष्ट करेंगे ?"
अब महोदय क्या स्पष्ट करते ? उनका तो मकसद था सरदार बल्लभ भाई पटेल के नाम पर नहरू की छवि को धूमिल करने का. वे तो आकाश में धूल फेंक रहे थे, ताकि सूरज को ढँक कर कुछ अन्धेरा फैलाया जा सके.
एक महोदय को दिल में आ गया कि वे कश्मीर का एक नया इतिहास लिख दें. तो उन्होंने कलम उठाई और ऊं जय गोएबेल्स कहा और शुरू हो गए.....सबसे पहले उन्होंने तय किया कि वे कल्पित दस्तावेजों को गढ़ने की फैक्ट्री खोलेंगे. इस फैक्ट्री में जो दस्तावेज गढ़े जायेंगे, उनको आम आदमी के बीच परोसा जाएगा. फिर तय किया कि किस किस राष्ट्रनायक को खलनायक बनाना है. सो उन्होंने इतिहास गढ़ना और उसे प्रचारित करना शुरू कर दिया. उनको उपने इस गढ़ंत इतिहास से देश भर में बहुसंख्यक वोट फिर से कब्जियाना था, जिसे वे श्री राम को धोखा देने के कारण खो बैठे थे. उन्होंने श्री राम का मंदिर वहीँ बनाने की घोषणा की थी लेकिन कहीं भी मंदिर नहीं बनाया. अगर बना देते तो उनका चुनावी मुद्दा ही समाप्त हो जाता. सो वे बेवकूफ तो थे नहीं कि श्री राम जी का मंदिर बनवा देते और अपने मुद्दे की ह्त्या कर देते.
महोदय जी ने अपने गुरू गोएबेल्स से आशीष लिया. गोएबेल्स ने उनको सपने में आ कर बताया," हे वत्स! कोरा झूठ चमत्कारपूर्ण नहीं होता है. आधा सच और आधा झूठ का मिक्सचर बनाओ और अपने कुत्सित लक्ष्य को प्राप्त करो. मेरा पूरा पूरा आशीष तुमको है. कश्मीर जाओ और वहां की समस्या रूपी आग में घी डालो और खुश रहो. जब कश्मीर में पाकिस्तानी आतंकी जोर लगायें और दंगा करें तो अपने विरोधियों की जम कर आलोचना करो, सरकार की आलोचना करो और सीना ठोंक कर गर्व से कहो कि सरकार विफल है, निकम्मी है, देशद्रोही है.....तुम कोई भी आरोप लगा सकते हो...आरोप लगाने के लिए किसी आधार की जरूरत नहीं होती है. बस, आरोपों को बार बार दुहराते चले जाओ, तुमको भी लगने लगेगा कि बेटे तुम सत्य बोल रहे हो.बहुतों का इस प्रोपगंडा से ब्रेन वाश हो जायेगा और वे भी तुम्हारी तरह ही सोचने लगेंगे."
फिर क्या था, उनका गढ़ंत इतिहास तेजी से फलने लगा. सभी जानते हैं कि झूठ कि गति अनंत होती है. सो हजारों लोग, उस नए स्वाद के इतिहास में डूब गए. लेकिन, क्या होगा मेरे देश का जिसकी आजादी बड़ी कुर्बानी के बाद मिली है ? यह गोएबेल्स के चेले नहीं सोचते हैं. लेकिन समय बड़ा बलवान होता है. उसके सामने सच के अलावा कुछ भी ज़िंदा नहीं बचता है.
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