भ्रष्टाचार पर एक महामानव भाषण दे रहे थे- सोनिया जी देखें, कलमाडी जी ने कितना लूटा है और कितना लुटाया है. देखिये, हम तो इस मामले में ज़रा जोर दे कर बोल नहीं रहे हैं. मामला बड़ा सीरीअस है. इस कामन वेल्थ गेम से हमारे देश की प्रतिष्ठा जुडी है. आप जानते ही हैं कि हमारी पार्टी पूरी तरह दूध से धोई है.
देखिये, यह बात सच है कि मेरे तीस पैंतीस सांसद प्रश्न के बदले घूस लेते हुए पकडे गए थे. पूरी दुनिया ने उनको टीवी पर घूस लेते देखा था. लेकिन, यह मामला ज्यादा दिनों तक पब्लिक के बीच में नहीं टिका. हम खुश नसीब हैं कि हमारे विरोधियों को किसी मामले को लंबा खींचने का टेक्नीक मालूम ही नहीं है. वे गोएबोल्स जी को कभी अपना भगवान् या गुरू मानते ही नहीं. खैर, हमारे उन सांसदों के खिलाफ घूस लेने का मामला प्रमाणित था, सो हम लोगों ने उन सांसदों के खोने का गम नहीं मनाया. एक दम से गुमसुम रह गए.
हाँ, मैं आज जिस कुर्सी पर बैठा हूँ, उसी कुर्सी पर बैठे, मेरे एक पूर्वर्ती राष्ट्रीय अध्यक्ष को भी पूरी दुनिया ने घूस लेते हुआ देखा. उनका भी बोरिया बिस्तर हमने बांध कर नागपुर पार्सल कर दिया. उस समय भी हमने कुछ नहीं कहा. लेकिन, कलमाडी के मामले में तो हम ने साफ़ साफ़ कहा है कि दोषी के खिलाफ ठोस कार्यवाही हो. अब सोनिया जी पर डिपेंड करता है कि वे कब घोटाले की जाँच करवाती हैं और कब कलमाडी को कमंडल पकड़ाती हैं. जाँच-वांच का काम हमारे मुताबिक़ ही सोनिया जी गेम हो जाने तक रोके रखना चाहती हैं. यह तो हमारे हक़ में है. इस कामन वेल्थ गेम का घोटाला हमारे लिए पर्सनल एंड पालिटिकल वेल्थ साबित होगा.
हाँ, हम इस मामले को बिहार चुनाव में जोर दे कर उठाएँगे, क्योंकि अभी इस पर ज्यादा जोर मारने से एक बड़ा मामला चुनाव के पहले ही हवा में गुम हो जायेगा. सो, अभी हम इस मामले को हल्का हल्का सुलगाये रखेंगे. जिन्दा रखेंगे. ठीक बिहार चुनाव के समय हम इस मामले को तोप के आगे रख कर, बिहार में उछाल देंगे. यह सालिड मामला है. जब हम बोफोर्स तोप पर एक चुनाव जीते थे, तभी हम समझ गए थे कि पब्लिक आरोप में विश्वास करती है, अफवाह में विश्वास करती है, वह कोर्ट के फैसले से पहले हमारे फैसले को तरजीह देती है. विश्व के किसी भी लोकतंत्र में ऎसी जनता नहीं मिलेगी. हम खुश नसीब हैं.
देखिये, हम जानते थे कि बोफोर्स मामले में कोई नहीं फंसेगा, लेकिन हमने उस मामले को सच साबित करने के लिए भ्रष्टाचार के अमाउंट से चार गुना ज्यादा पब्लिक का पैसा खर्च कर दिया, तो कर दिया. जब तक मामले पर जाँच चलती रही मामला गर्म रहा और बेचारे राजीव जी पर लोग शंका करते रहे. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने बोफोर्स मामले में राजीव जी को दोषी नहीं ठहराया और न क्वाचेत्री को. जब हमारे हाथ में सी बी आई थी, तब भी हम प्रमाण खड़ा या पैदा नहीं कर पाए. लेकिन, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी हम जब चाहते हैं, बोफोर्स की बात करते हुए थकते नहीं हैं.
हाँ, उस समय जरा जी घबराया था, जब एक विदेशी कोर्ट ने बोफोर्स केस के एक अभियुक्त को बिना सबूत के गिरफ्तार करने की हमारी सरकारी एजेन्सी की मांग पर जुर्माना लगा दिया था. हम तब भी ज़रा घबराये थे जब इसी मामले में अजीताभ बच्चन ने इंग्लॅण्ड के एक कोर्ट में कुछ समाचार पत्रों पर केस कर दिया था और समाचार पत्रों ने फटा-फट मान हानि का जुर्माना भर के छुट्टी पा ली थी. लेकिन, पब्लिक मेमोरी पर हमको पूरा भरोसा था. पब्लिक की मेमोरी बड़ी शार्ट होती है. और हमारा अनुमान ठीक ही निकला. लोगों ने इस फैसले पर ध्यान ही नहीं दिया. सो आज भी हम बोफोर्स पर बोलते हैं.
हाँ, इसी मामले को उठाते हुए एक दलबदलू नेता ने जोश में बड़ी गड़बड़ी कर दी थी- कह दिया था,"हमारी सरकार बनी तो मै बोफोर्स घोटाले से जुड़े सारे नामों को सरकार बनने के सात दिन के अन्दर जारी कर दूंगा. घोटालेबाजों की लिस्ट मेरी जेब में है." लेकिन, कोई लिस्ट उनके पास नहीं थी. पब्लिक की मेमोरी बड़ी शार्ट होती है, सो किसीने नेता जी के वादे को ज्यादा याद नहीं किया.
देखिये, भ्रष्टाचार कई तरह के होते हैं. सिर्फ पैसों की लूट को आप भ्रष्टाचार क्यों मानने की गलती करते हैं ?. राजनीतिक भ्रष्टाचार पर भी मेरे विचार और नीति बहुत ही स्पष्ट है. ज़रा सुनिए, अयोध्या मामले पर हमने कितना शोर मचाया. उससे अधिक हमारे विरोधियों ने शोर मचाया. हम चाहते थे कि हमारे विरोधी इस मामले में सच बोलते हुए हमारे खिलाफ खूब बोलें, खूब शोर मचाएं और सभी विरोधियों ने वैसा ही किया. वे खूब बोले. बस हमारा काम बन गया. इस मामले पर हमने खूब वोट काटा. ऐसे राजनीतिक भ्रष्टाचार को आज की राजनीति कहते हैं. सो सिर्फ भावना भड़का कर वोट लेने की जो हमारी तरकीब थी, जो नीति थी, वह गोएबेल्स महोदय की कृपा से पूर्ण हो गयी.
अब आपको बता दें कि हमारी सफलता का राज है, प्रचार पर ध्यान देना और थेथरोलाजी से काम लेना। जब नेता थेथरोलाजी से काम लेता है तो जनता पर बार बार दबाव पड़ता है। हम जितनी बार अपनी बात को दुहराते हैं उतनी ही बार जनता भ्रम में पड़ जाती है और सोचने लगती है कि जब कोई इतने दम के साथ कुछ बोल रहा है तो कुछ न कुछ तो जरूर सच है। और यही हमारा फंडा है।

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