शुक्रवार, 3 सितंबर 2010

अर्जुन बनेगें कि रघुवर......कि सिन्हा जी कब्जियायेंगे कुर्सी ?

अर्जुन बनेगें कि रघुवर......कि सिन्हा जी कब्जियायेंगे कुर्सी ?

            सगरो बड़ा छटपटाहट  है...कौन होगा अगला मुख्मंत्री ? इसी पर करते हैं आपसे दस हजार के लिए  सवाल नंबर वन.....अर्जुन का निशाना बेहतर था कि रामचंद्र जी(रघुवर) का? आपके लिए आप्शन है-(ए) दोनों में से किसी का नहीं. (बी) अर्जुन का, अगर निशाना कुर्सी पर साधना हो.(सी)रामचंद्र का, अगर निशाना थैली पर साधना हो (डी)अर्जुन का, अगर निशाना गडकरी पर साधना हो.
            सर, मेरा जवाब साफ़ है कि मैं आप्शन (डी) को मानूंगा क्योंकि इस आप्शन एक साथ दो काम करेगा..अर्जुन की तीरंदाजी भीई पास हो जायेगी और गडकरी का bhii .......

           अरे आप यह क्या कह रहे हैं.....आप सिर्फ आप्शन बोलिए उसे चुनने का कारण मत बताइए....अगर आप कारण बताना शुरू कर देंगे तो सब उल्टा-पुल्टा हो जाएगा...हमारा खेल हंगामे में बदल जाएगा....कुर्सी फिक्सिंग शुरू हो जायेगी. सी.बी.आई. बुला ली जायेगी...लम्बी जाँच चलेगी और सभी अभियुक्त छूट जायेंगे और इस बीच बिना  पैसा लगाये रोज पब्लिसिटी पा लेंगें. राजनीति में उनकी तरक्की  हो जायेगी. सो आप सिर्फ आप्शन बोलिए....

            सर मैं आप्शन (डी) पर अडिग हूँ...मैं कोई लफड़ा मोल नहीं लेना चाहता और आप भी लफडा मोल लेना नहीं चाहते, यह बात मुझे पसंद आई, लेकिन आपने राजनीति से सम्बंधित प्रश्न क्यों  उठाये...

           अरे, अरे आप तो मेरे काम करने की कोशिश कर रहे हैं...प्रश्न करना मेरा काम है और आपका काम सिर्फ जवाब देना है. और मै यंहां का लालू हूँ और जहाँ लालू होते हैं वहां दूरा अगर बोलता है तो उसकी फजीहर निश्चित है, समझे कि नहीं.

          लेकिन एक लघु शंका है....

         अरे, अरे आप हाट कुर्सी पर बैठ कर क्या बोल रहे हैं? आपको फारिग हो कर ही हाट कुर्सी पर आना चाहिए था. फिर भी आप  क्या कहना चाहते हैं जल्दी कहिये....

         सर जी, आपने महामना सिन्हा जी को चीफ मिनिस्टर के आप्शन में क्यों नहीं रखा? वे भी थो कुर्सी पाने के लिए चत्पताये हुआ हैं...

         मै ज्यादा पालिटिक्स नहीं जनता.... एक बार अक्तिव पालिटिक्स में कूदा था और एक अच्छे दोस्त को खो बैठा...यूपी का ब्रांड अम्बेसडर बना और फिर से विवादों में घिर गया...फिर पर्लती मरी और गुजरात का ब्रांड अम्बस्दर बन गया. पता नहीं अब क्या होगा, लेकिन जब अपर्णा सर ऊखल में डाल ही दिया है तो मूसल से क्या डरना...

         खैर, पचास हजार के लिए यह रहा अगला प्रश्न - क्या नीत्तीश जी ने बिहार को सेंटर के पैसे से तरक्की दी या या फिर कोई और ट्रीक  अपनाया?

         सर जी, आपने फिर से राजनीतिक प्रश्न ही परोस दिया है...मैं फिर बोलूँगा तो आप कहेंगे की मेरा बोलने का काम नहीं है, यश काम सिर्फ और  सिर्फ आपके और नेताओं का काम है...आप जनता हो और नीतीश जी को सुन कर जाँ लो कि आपकी कितनी तरक्की हुई है....उनकी इस्पीच से पता चलता है की बिहार और उसकी जनता की तरकी इतनी हुई है, इतनी हुई है कि लोगों की आँखें चौंधिया गई हैं और लोग कुछ देख और सुन नहीं पा रहे हैं...मैं तो सदमे में  हूँ यह जाँ कर कि मेरे बेजोर तरक्की हो गई है...अरे सर जी मैं तो यहाँ आने से पहले अपनी का गहना बेच कर आया हूँ और अगर फेल कर गया तो फिर किसी दूसर राज्य में जा कर रोजी रोटी तलाशनी होगी और अगर मुंबई जाने की नौबत आई तो नीतीश जी के गठबंधन के शिव सैनिको के जूते खाने के लियेया सम्मान के साथ तैयार रहना होगा......


         




























          

7 टिप्‍पणियां:

  1. सर झारखंड की राजनीति में कुछ भी संभव है इसलिए एक ऑप्शन Mr.X का भी रख लीजिए... पता नहीं कब कोड़ा जैसे लोग आकर कुर्सी हथिया ले.... वैसे इतने अच्छे प्रस्तुति के लिए बधाई सर

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  2. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

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  3. अच्छी प्रस्तुति के लिए बधाई|

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  4. bahut khub likha hai...
    mere blog par aakar bhi charitarth karein....

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  5. हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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